तुम एक स्याह हो एक कलम
तुमसे अगणित बार लिखूंगा
तुम एक विषय हो एक विशेषण
तुमपे अगणित बार लिखूंगा
तुमको ही संसार लिखूंगा
तुमको ही अधिकार लिखूंगा
जीवन के इस पार लिखूंगा
जीवन के उस पार लिखूंगा
तेरी खुशियों का अंबार लिखूंगा
तेरे दर्दों का आधार लिखूंगा
सांसों का संचार लिखूंगा
धड़कन की रफ्तार लिखूंगा
तुझको ही माणिक हार लिखूंगा
तुझको ही सोलह श्रृंगार लिखूंगा
दर्पण के इस पार लिखूंगा
दर्पण के उस पार लिखूंगा
- संदीप सिंह