BEPOETRIC-Infinite Love Infinite Pain
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Tuesday, April 9, 2024
पौरुष
Tuesday, November 1, 2022
लिखूंगा
तुम एक स्याह हो एक कलम
तुमसे अगणित बार लिखूंगा
तुम एक विषय हो एक विशेषण
तुमपे अगणित बार लिखूंगा
तुमको ही संसार लिखूंगा
तुमको ही अधिकार लिखूंगा
जीवन के इस पार लिखूंगा
जीवन के उस पार लिखूंगा
तेरी खुशियों का अंबार लिखूंगा
तेरे दर्दों का आधार लिखूंगा
सांसों का संचार लिखूंगा
धड़कन की रफ्तार लिखूंगा
तुझको ही माणिक हार लिखूंगा
तुझको ही सोलह श्रृंगार लिखूंगा
दर्पण के इस पार लिखूंगा
दर्पण के उस पार लिखूंगा
- संदीप सिंह
Sunday, October 23, 2022
टूटने का नई
वो मुझे छोड़ के गई
मुंह मोड़ के गई
पूरा तोड़ के गई
बोली अपना मैच नहीं है,
और तो और दिल भी अटैच नहीं है
लेकिन नई नई नई
नई मैं टूटा नई हूं रे
नई मैं रूठा नई हूं रे
मैं सच बोलता बेबी मैं सच बोलता
मैं झूठा नई हूं रे
तू जा जा, तू अपना मैच कर
ढूढ, किसी को दिल अटैच कर
अरे टेंशन लेने का नई
मैं पटरी पे कूदेगा नई
में पंखे से झूलेगा नई
मैं नदिया में डूबेगा नई
मैं सुट्टे पे सुत्ता सुट्टे पे सुत्ता
सुट्टे पे सुत्ता खीचेगा नई
मैं अपने ही आसुओं में
रो रो के भीगेगा नई
जा मेरी जां, जा जा जा
जा ऐश कर
आई प्रॉमिस, मैं तुझको दिखेगा नई
दिखेगा तो मिलेगा नई,
मिलेगा तो बात काई को करेगा
बात किया भी तो करेंट अफेयर्स की करेगा,
क्रिकेट प्लेयर्स की करेगा,
मैं चीखेगा नई चिल्लाएगा नहीं
बात मान मैं झुंझलाएगा नहीं
गुस्साएगा नहीं
मैं होश खोएगा नहीं मेरी जान मैं रोएगा नहीं
- संदीप सिंह
Thursday, October 6, 2022
मगर आज मेरा दिल तन्हा है...
न जाने कितनी रातें
न जाने कितनी बातें
जाने कितनी सौगातें
मगर आज मेरा दिल तन्हा है...
न जाने कितनी डगर
न जाने कितने सफ़र
जाने कितने हमसफ़र
मगर आज मेरा दिल तन्हा है...
न जाने कितने सिलसिले
न जाने कितनी महफिलें
जाने कितने दिल मिले
मगर आज मेरा दिल तन्हा है...
- संदीप सिंह
रात
ये रात काली ये आसमां नीला
ये हसीन तारे चंद्रमा रंगीला
ये राह सूनी ये बरगद सजीला
ये सड़क पे सोता कोई कबीला
ये भूखा बच्चा खाली पतीला
ये रात काली ये आसमां नीला
ये मुड़ती सड़क ये परछाइयां
ये घना अंधेरा उसपे तन्हाइयां
ये रोता बेटा मां की रुबाइयां
ये रोती मां बाप की दवाइयां
यही तो है रात की सच्चाइयां
ये मुड़ती सड़क ये परछाइयां
- संदीप सिंह
तुम समझोगी!
मैं तुमसे कहूं भी तो क्या, तुम समझोगी
आवारा है मनचला कहीं का
मैं कह भी दूं कि मधुबाला लगती हो,
मुस्कुराती हो जब, तुम समझोगी
बेशरम है बेहया कहीं का
मैं कह भी दूं कि थामे रक्खूंगा हाथ
बड़ी से बड़ी मुश्किलों में, तुम समझोगी
नौटंकी है बावला कहीं का
मैं तो कह दूं कि इश्क़ है तुमसे, जैसे
अदरक को चाय से, रास्ते को सफ़र से
मगर तुम समझोगी, कोई
मदमस्त, मस्तमौला, छैला कहीं का
- संदीप सिंह
Tuesday, September 20, 2022
वो
वो लाज लपेटे लाल हुई
वो फिर से आज कमाल हुई
वो छत पे गीले बाल हुई
वो फिर से आज बवाल हुई....
वो पल्लू लपेटे कूल्हे पे
वो फिर से आज कमान हुई
वो सुर्ख गुलाबी होठ लिए
वो पनवारी का पान हुई....
वो केशों के मेघ लिए उमड़ी
वो फिर मयखाने की शाम हुई
वो नैन नशीले मतवाले से
वो फिर पैमाने का जाम हुई....
- संदीप सिंह
पापा
मेरे जीवन की नीव जिसने गढ़ी है
मेरी सांसों की धार जिससे बढ़ी है
जिसकी उंगली पकड़ के दौड़ा हूं मैं
जिसकी आंखों से दुनिया मैंने पढ़ी है
सर पे हाथ रख के विजय कर दिया
असंभव लड़ाई जिसके दम से लड़ी है
जिसने नीद ओ चैन लुटा दी मेरे लिए
मेरी खातिर ख़ुद की मुश्किलें गढ़ी हैं
मेरे सपने ज़िंदा रह सके इस ख्वाहिश में
जिसके ख्वाबों की हर दिन बलि चढ़ी है
ज़िन्दगी से जूझता रहा खामोशी समेटे
मुझे देख चेहरे की जिसकी हसी बढ़ी है
जिसे देख के लगता है सारी दुनिया मेरी है
जिसकी सूरत भगवान ने भगवान सी गढ़ी है
- संदीप सिंह
Saturday, September 17, 2022
मेरे साथ चलो कुछ दूर!
यूं हाथ छूटा सहसा तो न जाने क्या होगा
मेरे यार, मेरे साथ चलो कुछ दूर
इस अंतहीन सफ़र में छांव भी नहीं दिखती
ऊपर से ये धूप बड़ी मगरुर
मेरे यार, मेरे साथ चलो कुछ दूर
सबसे सुना है पथ पथरीला रस्ता खाबड़
जहरीले सांपों से भरपूर
मेरे यार, मेरे साथ चलो कुछ दूर
ऊपर से सब रंगे हुए है नेकी के रंगों से
अंतस में सारे ही हैं क्रूर
मेरे यार, मेरे साथ चलो कुछ दूर
ये भी तय है सुमन खिलेगें पथ में बहारों का दस्तक होगा
पर तुम बिन कैसा नूर
मेरे यार, मेरे साथ चलो कुछ दूर
एक चले जाने को साहस हृदय नहीं करता
पर मैं नियति से मजबूर
मेरे यार, मेरे साथ चलो कुछ दूर
- संदीप सिंह
Saturday, August 13, 2022
असहाय
वो चीखी होगी बहोत चिल्लाई तो होगी
वो बच्ची उस दिन बहोत रोई तो होगी
दरिंदों ने जब जकड़ा होगा चंगुल में उसे
हाथ पैर पटके बहोत छटपटाई तो होगी
माना कि बहुत क्रूर थी उस दिन की हवाएं मगर
लौ बुझने के पहले बहोत फड़फड़ाई तो होगी
सोची होगी कोई तो आ जाए बन के ख़ुदा
अपने भगवान से गुहार लगाई तो होगी
गीता में लिखा है कि वो सब जानता है
देख उसको उसे फिर दया आई तो होगी
मुझे अचरज नहीं कि सब मौन बैठे हैं जमीं पर
तुझे ख़ुदा कहते हैं तुझमें कुछ करिश्माई तो होगी
जिनके पापों को भूल जाती रही है ये दुनिया
उनके हिसाबो की किताब तूने बनाई तो होगी
इंसाफ़ करने में अब ज्यादा वक़्त मत लगाना भगवन
मुझे डर है देर हुई तो तेरी जग हसाई तो होगी
- संदीप सिंह