इक ख़्वाब सा
हाथ पकड़ कर चल मेरा
कोई नई कहानी हो जाये
छत के ऊपर चाय पिएं
हर शाम सुहानी हो जाये
गुज़रा बचपन गलियों में
तेरे नाम जवानी हो जाये
हो जाये तू मुझको हासिल
हर चीज़ बेगानी हो जाये
सुबह-शाम मैं देखूं तुझको
कोई चीज़ नूरानी हो जाये
बन जाऊं मैं तेरा दीवाना
तू मेरी दीवानी हो जाये
हाथ पकड़ कर चल मेरा
कोई नई कहानी हो जाये
-संदीप सिंह
