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Sunday, June 26, 2022

नंदी के कैलाश वापसी

 

गौरा कहिन गणेश से

जाई खड़े दुआरे हो

केउ न भितरे आवई पावई

चाहे जे केउ होय 


माता के आज्ञा पाई के

भयें दुआरे ठाढ़ 

अब कोहू न अंदर जाई देब

आंधी होई कि बाढ़ 


कुछ देर भई कि नंदी पहुंचे

भूतन के टोली संग

दिखिन गदेला रस्ता रोके

हंस हंस के पड़ि गएं दंग


कहिन गणेश का प्यार से

हम भोले के दूत

हमका अंदर जाई दा

करा न कौनऊ करतूत


फेर नंदी से गणपति कहिन 

हमार एकई बात विशेष

पार्वती हमार माता अउर 

हम ओनकर दास गणेश


केउ न अंदर जाई पाई

रहतई गौरी पूत

तू ता बस दूतई आहा

हम रोकि देब यमदूत


सुनि के उल्टी बात

नंदी का आवा क्रोध

देखा बेटवा अइसन है

तू हा अबा अबोध


प्यार से समझाइत ही

रस्ता छोड़ा हमार

अ द्वारपाल आहा ता

जाई के खोला द्वार


लड्डू पकड़ावत नंदी का

पूछिन लड्डू लेब

हिअइन बैइठि के लड्डू खई

अंदर ता न जाई देब


अब नंदी का खिसियानी छूट

गुस्सा मां हल्ला बोलि दिहिन

अ हर हर महादेव चिल्लाई के

गणपति पर धावा बोलि दिहिन


लेकिन बाल न बांका कई पाइन

सब जने भएं हताश

उल्टे पांव दौड़ि पड़े 

भागत पहुंचे कैलाश

सब हांफत पहुंचे कैलाश

कि सब कांपत पहुंचे कैलाश

हर हर महादेव

                - संदीप सिंह 


          


Wednesday, June 22, 2022

अगर तुम लौट आते!

 

फूल खिलखिला उठते बगिया में

भौंरे फिर मनचले हो जाते

जरा सा खोल लेता दिल मैं भी

अगर तुम लौट आते


सरगम फिर गुनगुना उठती

गीत फिर से बहक जाते

जरा सा मैं भी हो जाता आवारा

अगर तुम लौट आते


चांद भी आता चांदनी लपेटे

तारे भी टिमटिमा जाते

जरा सा थोबड़ा मैं भी सजाता

अगर तुम लौट आते

              -    संदीप सिंह