फूल खिलखिला उठते बगिया में
भौंरे फिर मनचले हो जाते
जरा सा खोल लेता दिल मैं भी
अगर तुम लौट आते
सरगम फिर गुनगुना उठती
गीत फिर से बहक जाते
जरा सा मैं भी हो जाता आवारा
अगर तुम लौट आते
चांद भी आता चांदनी लपेटे
तारे भी टिमटिमा जाते
जरा सा थोबड़ा मैं भी सजाता
अगर तुम लौट आते
- संदीप सिंह
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