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Tuesday, April 9, 2024

पौरुष

गिरा रहेगा कब तक उठ भी जा
ठान ले ज़िद अब अड़ भी जा
आंख बंद कर ख्वाबों को समेट
चल भींच ले मुठ्ठी लड़ भी जा

उठ आंखों में अंगार भर
चल सीने में हुंकार भर
अपनी सांसों में फुंकार भर
आजा हाथों में औजार भर

अब आता है तूफां तो आने दे 
आंधी को भी जी बहलाने दे 
वो पौरुष ही क्या जो चलती सांसों में घुटने टेके 
अब जाती है जान तो जाने दे





                                       - संदीप सिंह