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Sunday, April 19, 2020

साँवरे


साँवरे




मेरो तन संग रँग गयो, मेरो मन साँवरे
मोहि रँग के दे गयो, इक उलझन साँवरे
तोहि सोच, मेरो रोम रोम है मगन साँवरे
अति बरसत है आज, प्रसन्न हो गगन साँवरे 
तन गया तर और, भीग गई धड़कन साँवरे
मेरो तन संग रँग गयो मेरो मन साँवरे.....

मोहि छेड़त जात है, हर घट पनघट साँवरे
सखियाँ रिझावत हैं, लटक लटक कर मटक साँवरे 
रँग डारो मोहि अंग अंग, लपट झपट साँवरे
कोमल कलइयाँ हैं, खींच के न झटक साँवरे
चूनर चिपकी तन से, कुर्ती में सिलवट साँवरे
मोहि छेड़त जात है हर घट पनघट साँवरे.....

मैं शरमाई, सकुचाई, लाज से लाल साँवरे
तोरे हाथन से रँग के आज, हूँ निहाल साँवरे
चैन नहीं मनवा को, मत पूछ, मेरा हाल साँवरे
गाल लाल और केश जाल, सब तोरे नाल साँवरे
बहकत जात हूँ मैं, मोहे अब सँभाल साँवरे
मैं शरमाई सकुचाई लाज से लाल साँवरे.....


                                                                                                                                      - संदीप सिंह

Friday, April 17, 2020


अच्छा किया तुमने!

राज़ की बातें खोलकर अच्छा किया तुमने
दिल में जो था बोलकर अच्छा किया तुमने
शहद सी तुम्हारी बातों को इश्क़ समझ कर पीते थे
आज कड़वाहट घोलकर अच्छा किया तुमने

दरवाजा खुला छोड़कर अच्छा किया तुमने
जो सो गई चादर ओढ़कर अच्छा किया तुमने
मैं समझता था मुझे चाहती हो तुम मेरी तरह
आज वहम वो तोड़कर अच्छा किया तुमने

भरी महफ़िल में बदनाम कर अच्छा किया तुमने
यूं तमाशा सरे आम कर अच्छा किया तुमने
अपना मान बैठे थे तुम्हें हम उम्र भर के लिए
आज हाथ गैर का थामकर अच्छा किया तुमने

मेरे दर्दों से मुह मोड़कर अच्छा किया तुमने
मेरा गम से रिश्ता जोड़कर अच्छा किया तुमने
भ्रम था आंसुओं को देख पिघल जाओगी तुम
पर आज रोता छोड़कर अच्छा किया तुमने
आज कड़वाहट घोलकर अच्छा किया तुमने
आज वहम वो तोड़कर अच्छा किया तुमने
आज हाथ गैर का थामकर अच्छा किया तुमने


                                - संदीप सिंह