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Tuesday, November 20, 2018






                            बचपना इश्क 

दिल तेरा जब से मेरा ठिकाना हुआ है 
और ज्यादा घर से आना जाना हुआ है 
दोस्त के घर, कभी ट्युशन का बहाना हुआ है 
जब से तेरा दिल मेरा ठिकाना हुआ है 



ऐसी लागी लगन, कि हर फूल पत्थर में तू 
हर घर, हर बस्ती, नुक्कड़ हर शहर में तू 
जिस ओर जाए नज़र तू ही आए बस नज़र 
भँवरों में, फूलों में, हर चमन बंजर में तू 

अपना घर छोड़ सारा जहाँ आशियाना हुआ है 
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है 



चेहरे के सिवा तेरे, कुछ और दिखता नहीं 
तेरे नाम के अलावा हाथ कुछ लिखता नहीं 
बेवजह चेहरे पर मुस्कान बिखरी पड़ी है 
माँ परेशां है, क्यों एक जगह ये ठहरता नहीं 

लब तो ठीक हैं, आँखों का भी मुस्कुराना हुआ है 
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है 



सब्जी लेने जाता हूँ तो दूध लेकर आता हूँ 
कोई पूछता कुछ, मैं कुछ और ही बताता हूँ
घर वाले जब कहते हैं क्या होगा फ्यूचर तेरा 
मैं  हँसता हूँ, और हँस कर तेरी तस्वीर दिखाता हूँ 

रात नींद आए न, बस पलकों का गिराना उठाना हुआ है 
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है 
दोस्त के घर, कभी ट्युशन का बहाना हुआ है 
जब से तेरा दिल मेरा ठिकाना हुआ है
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है..................                                     



संदीप सिंह