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Tuesday, November 1, 2022

लिखूंगा

तुम एक स्याह हो एक कलम 

तुमसे अगणित बार लिखूंगा 

तुम एक विषय हो एक विशेषण 

तुमपे अगणित बार लिखूंगा


तुमको ही संसार लिखूंगा 

तुमको ही अधिकार लिखूंगा 

जीवन के इस पार लिखूंगा 

जीवन के उस पार लिखूंगा


तेरी खुशियों का अंबार लिखूंगा 

तेरे दर्दों का आधार लिखूंगा

सांसों का संचार लिखूंगा 

धड़कन की रफ्तार लिखूंगा


तुझको ही माणिक हार लिखूंगा 

तुझको ही सोलह श्रृंगार लिखूंगा 

दर्पण के इस पार लिखूंगा 

दर्पण के उस पार लिखूंगा


                   -  संदीप सिंह