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Tuesday, November 20, 2018






                            बचपना इश्क 

दिल तेरा जब से मेरा ठिकाना हुआ है 
और ज्यादा घर से आना जाना हुआ है 
दोस्त के घर, कभी ट्युशन का बहाना हुआ है 
जब से तेरा दिल मेरा ठिकाना हुआ है 



ऐसी लागी लगन, कि हर फूल पत्थर में तू 
हर घर, हर बस्ती, नुक्कड़ हर शहर में तू 
जिस ओर जाए नज़र तू ही आए बस नज़र 
भँवरों में, फूलों में, हर चमन बंजर में तू 

अपना घर छोड़ सारा जहाँ आशियाना हुआ है 
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है 



चेहरे के सिवा तेरे, कुछ और दिखता नहीं 
तेरे नाम के अलावा हाथ कुछ लिखता नहीं 
बेवजह चेहरे पर मुस्कान बिखरी पड़ी है 
माँ परेशां है, क्यों एक जगह ये ठहरता नहीं 

लब तो ठीक हैं, आँखों का भी मुस्कुराना हुआ है 
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है 



सब्जी लेने जाता हूँ तो दूध लेकर आता हूँ 
कोई पूछता कुछ, मैं कुछ और ही बताता हूँ
घर वाले जब कहते हैं क्या होगा फ्यूचर तेरा 
मैं  हँसता हूँ, और हँस कर तेरी तस्वीर दिखाता हूँ 

रात नींद आए न, बस पलकों का गिराना उठाना हुआ है 
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है 
दोस्त के घर, कभी ट्युशन का बहाना हुआ है 
जब से तेरा दिल मेरा ठिकाना हुआ है
कि तेरा दिल जब से मेरा ठिकाना हुआ है..................                                     



संदीप सिंह 







Wednesday, September 26, 2018




                                          फिर से बच्चा बना दे, ऐ ज़िंदगी !

ऐ ज़िंदगी चल झाँके जरा बचपन में 
ऐ ज़िंदगी तू मुझे फिर से अच्छा बना दे 
नहीं सम्भलेगी मुझसे ये जद्दोज़हद तेरी 
ऐ ज़िंदगी तू मुझे फिर से बच्चा बना दे  

ये भाग दौड़ ये नाकामियाँ 
ये रोज-रोज के तमाशे 
रातों की नींदे लूट बैठी 
ये बेकार झूठी ख्वाहिशें 
तोड़कर इन ख्वाहिशों के तिलिस्म को 
ऐ ज़िंदगी तू मुझे फिर से सच्चा बना दे 
ऐ ज़िंदगी तू मुझे फिर से बच्चा बना दे


ये फालतू दुनियादारियाँ 
ये तमाम परेशानियाँ 
थक गए मेरे कंधे उठाते 
ये बेमतलब ज़िम्मेदारियाँ 

जा लाद किसी और पे अपनी ये झंझटें 
मुझे मेरा बस्ता दे और बच्चा बना दे 
ऐ ज़िंदगी मेरा बचपन मुझे लौटा दे 

किसी का दिल दुखाऊँ मैं 
कोई मेरा तोड़ दे 
साथ न निभा पाऊँ तो 
कोई मुझे छोड़ दे 
जरुरत नहीं किसी सफर हमसफ़र की 
ऊँगली पकड़ा के पापा की फिर से चला दे 
ऐ ज़िंदगी तू मुझे फिर से बच्चा बना दे



ये सुबह का जाना 
और शाम को आना 
मुझे कुछ जमता नहीं 
लोगों से मिलना मिलाना 
बड़ी-बड़ी बातों के ढ़र्रे से डरता हूँ मैं 
दे के खिलौना मुझे फिर बच्चा बना दे 
ऐ ज़िंदगी मेरा बचपन मुझे लौटा दे


ये रिश्ते ये नाते 
ये वादे ये बातें 
दूर कर इनको मुझसे 
रत्ती भर नहीं सुहाते 
मत बाँध इन स्वार्थी बंधनों में 
बस मेरी माँ का छोटा बच्चा बना दे 
ऐ ज़िंदगी मेरा बचपन मुझे लौटा दे

जहाँ हर मन लज्जित हो 
विचार जहाँ संकुचित हो 
निर्णय लेती हो जरूरतें 
परिचित कौन अपरिचित हो 
ऐसी समझदारी न बख्स ऐ ज़िंदगी 
नासमझ सही पर तू मुझको अच्छा बना दे 
ऐ ज़िंदगी तू मुझे फिर से बच्चा बना दे

ये शाने-शौक़त 

ये तेरी दौलत 
ये महल अटाले 
ये तेरी ज़न्नत 
तुझको मुबारक ये तेरे ऐशो-आराम 
मुझे माँ का आँचल दे बच्चा बना दे 
ऐ ज़िंदगी मेरा बचपन मुझे लौटा दे

ये नज़्म ये रुबाइयाँ 
ये गीत और शहनाइयाँ 
दिल नहीं बहलाती मेरा
तेरी कोई कहानियाँ 

माँ की लोरी सुना के आराम से सुला दे 
ऐ ज़िंदगी मेरा बचपन मुझे लौटा दे
ऐ ज़िंदगी तू मुझे फिर से बच्चा बना दे





                                                         -SANDEEP SINGH-



Tuesday, September 11, 2018





                                             मैं और तुम : एक रिश्ता 




भवरा बन मडराऊँ मैं, तुम कँवल हो जाओ                 
चलो आज लिख दूँ तुमको, तुम गज़ल हो जाओ
हाथ पकड़ कर तुम मेरा, जो बैठो कभी बगीचे में
मैं टुक-टुक तुमको देखूँ, तुम ताज़महल हो जाओ





बन पतंग मैं उड़ता फिरूँ, तुम डोरी हो जाओ
जब नींद न आए रातों में, तुम लोरी हो जाओ
यूँ बस जाओ तुम आके मेरी रूह के अंदर
दिल चाहे ग़र धड़कना, तुम जरुरी हो जाओ


बन बाती मैं जल जाऊँ, तुम दिया हो जाओ
उठे हाथ दुआ में मेरे, तुम अर्जियाँ हो जाओ
हो असर मेरे गीतों में कुछ यूँ तुम्हारा
जब लिखुँ गीत कोई, तुम सुर्खियाँ हो जाओ



आवारा हो जब भटकूँ, तुम मंज़िल हो जाओ 
जब तन्हाई समेटे मुझको, तुम महफ़िल हो जाओ
चलो ख़त्म करे ये समझने समझाने का किस्सा
मैं दिल बन जाऊँ तुम्हारा, तुम मेरा दिल हो जाओ










सुनो,
चलो आज लिख दूँ तुमको, तुम गज़ल हो जाओ
मैं टुक-टुक तुमको देखूँ, तुम ताज़महल हो जाओ........

                                 





                                                                                                                              -संदीप सिंह 






Tuesday, August 14, 2018





Hiii Guys,
The next one is a very tiny try on this independence day for The Legend of All Time Revolutions, The One of the Youngest Patriot Ever, The real Atheistic........The one and only, none other than...............


                                             शहीद-ऐ-आज़म 
                          



तरसता है हर कोई जवानी को,
            पर था कोई, जिसके लिए जवानी तरस गई!
तरसता है हर कोई ज़िन्दगी को,
            पर था कोई, जिसके लिए ज़िन्दगी तरस गई!
तरसता है इंसा माँ की ममता को,
            पर था कोई, जिसके लिए माँ की ममता तरस गई!
                                             
                                                 
                                             
                         उसके ख्वाबों में आज़ादी थी
                         उसके रग-रग में आज़ादी थी
                          लफ़्ज़ों में उसके इंक़लाब
                         पग-पग में उसके आज़ादी थी
                         उसकी धड़कन में आज़ादी थी
                         उसकी बातों में आज़ादी थी
                         आँखों में उसकी सैलाब
                         सासों में उसकी आज़ादी थी


वो भगत था मेरा जिसने, खुशियों से मुँह मोड़ा था
आज़ादी का लेके ठेका, बिना रुके वो दौड़ा था
कुछ न सुनाई देता था, इस भगत नाम के शोर में
बच्चा-बच्चा भगत हुआ था, जा देखो लाहौर में

                                                 
सॉन्डर्स को भून दिया, पहन आज़ादी का चोला
भरी असेंबली फेक दिया, भगत ने मेरे बम का गोला
खड़ा वहीं मुस्काता रहा, पकड़ के मुझको दे दो फाँसी
भभक उठेगी फिर चिंगारी, देश मनाएगा आज़ादी
मेरा देश मनाएगा आज़ादी


ये धरती ही थी माँ उसकी, दुल्हन उसकी आज़ादी थी
चूमा था उसने फाँसी का फंदा, हस कर जान गवा दी थी
                       
                       
सिसकियों के सन्नाटे में ड़ूब गया था पूरा हिन्दोस्तां
इक वही दिन था करोङो अखियाँ एक साथ बरस गई   
                                      तरसता है हर कोई जवानी को,
                        पर था कोई, जिसके लिए जवानी तरस गई
                                       तरसता है हर कोई ज़िन्दगी को,
                        पर था कोई, जिसके लिए ज़िन्दगी तरस गई
                 पर था कोई, जिसके लिए माँ की ममता तरस गई
                         


                                         





                "स्वीकार करो 'संदीप' की ये छोटी सी नज़म!
             यादों में अमर रहोगे ओ मेरे 'शहीद-ए-आज़म!!"



   HAPPY INDEPENDENCE DAY....                   

                                SANDEEP SINGH

                 




Thursday, August 2, 2018

Hiiii Guys,

This is my blog Infinite Love Infinite Pain created for poems written by me and I am going to publish my first poem. I would like to start this journey with sorrow  based on the one who loves infinite but gain only the pain from other side because she was surrounded with expectations, need and better than she had.......

and the topic is..............    फ़ीका इश्क 


जो मुझमें है उनको रास नहीं आता,                               
जो नहीं है उसकी तलाश करते हैं !
जो मिला है उसकी क़द्र नहीं होती,
मिला नहीं जो उसकी फरियाद करते हैं !!



     
       आज़ादी है सबको ढूढ़े अपनी पसंदगी,
       अपनी ख्वाहिशों को क्यों बर्बाद करते हैं !
       देखेंगे हम भी ग़र रही ज़िन्दगी ,
       कौन हैं जो आपको आबाद करते हैं !!


दो पहलू का होता है हर एक सिक्का,
एक पहलू वाले तो ग़ुमराह करते हैं !
भर गया है दिल, तो साफ साफ कह दो,
तुम खुदा तो नहीं फिर भी फरियाद करते हैं !!



         यूँ बेरुखी से पेश आया न करो,
         इश्क है, इसलिए कुछ लिहाज़ करते हैं !
         कर ली बहुत मसक्कत आपने दूर जाने की,
         चलो आज हम भी आपका हिसाब करते हैं !!
चलो आज हम भी आपका हिसाब करते हैं !!!!!!!!!


SANDEEP SINGH



 Thanks a lot for being here and read the poem. Video of this poem will be uploaded soon on my youtube channel with the same name Infinite Love Infinite Pain and after that the next poem will be published, so...............wait for the next!!!!!!!!


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