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Tuesday, September 11, 2018





                                             मैं और तुम : एक रिश्ता 




भवरा बन मडराऊँ मैं, तुम कँवल हो जाओ                 
चलो आज लिख दूँ तुमको, तुम गज़ल हो जाओ
हाथ पकड़ कर तुम मेरा, जो बैठो कभी बगीचे में
मैं टुक-टुक तुमको देखूँ, तुम ताज़महल हो जाओ





बन पतंग मैं उड़ता फिरूँ, तुम डोरी हो जाओ
जब नींद न आए रातों में, तुम लोरी हो जाओ
यूँ बस जाओ तुम आके मेरी रूह के अंदर
दिल चाहे ग़र धड़कना, तुम जरुरी हो जाओ


बन बाती मैं जल जाऊँ, तुम दिया हो जाओ
उठे हाथ दुआ में मेरे, तुम अर्जियाँ हो जाओ
हो असर मेरे गीतों में कुछ यूँ तुम्हारा
जब लिखुँ गीत कोई, तुम सुर्खियाँ हो जाओ



आवारा हो जब भटकूँ, तुम मंज़िल हो जाओ 
जब तन्हाई समेटे मुझको, तुम महफ़िल हो जाओ
चलो ख़त्म करे ये समझने समझाने का किस्सा
मैं दिल बन जाऊँ तुम्हारा, तुम मेरा दिल हो जाओ










सुनो,
चलो आज लिख दूँ तुमको, तुम गज़ल हो जाओ
मैं टुक-टुक तुमको देखूँ, तुम ताज़महल हो जाओ........

                                 





                                                                                                                              -संदीप सिंह 






6 comments:

  1. Kash wo khush nasib hum hote


    Kalam apki hoti or zikr hmara

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    Replies
    1. Aap Jo bhi hai bahut bahut shukriya.....shukriya bhi sayad is baat ke liye Kam hai
      Aur ye Jo jikra hua hai un sabhi ke liye hai jinke pass aise hamsafar hai aur sabhi ki taraf se hai jo aise hamsafar hai Meri kalam to bas bahana hai.......

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