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Tuesday, September 20, 2022

वो

 


वो लाज लपेटे लाल हुई

वो फिर से आज कमाल हुई

वो छत पे गीले बाल हुई

वो फिर से आज बवाल हुई....


वो पल्लू लपेटे कूल्हे पे

वो फिर से आज कमान हुई

वो सुर्ख गुलाबी होठ लिए

वो पनवारी का पान हुई....


वो केशों के मेघ लिए उमड़ी

वो फिर मयखाने की शाम हुई

वो नैन नशीले मतवाले से

वो फिर पैमाने का जाम हुई....

                        

              - संदीप सिंह

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