गुरू
गुरु संदीपनी की असीम कृपा से
प्रभु कृष्ण बने थे नंद के लाला
ये गुरु द्रोण की शिक्षा दीक्षा थी
जो अर्जुन को धनुर्धर कर डाला
गुरु विश्वामित्र को कोटि नमन
जग को पुरुषोत्तम श्री राम दिया
गुरु चाणक्य का विश्वास था ये
नन्हें से बालक को सम्राट किया
कैसे भूलेगा जग श्री परशुराम को
तिरस्कृत कर्ण को महारथी बनाया
प्रणाम है गुरुवार श्री रामकृष्ण को
विवेक को जिसने ईश्वर से मिलाया
गुरु बिना सब माटी है,
गुरु बिना सब कच्चे हैं।
चाहे जितनी उम्र बढ़े
बिना गुरु सब बच्चे हैं।
- संदीप सिंह

No comments:
Post a Comment