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Thursday, April 11, 2019




                                                                                                               चौकीदार


   
 तोड़ दो या फोड़ दो      
या मुझे झकझोर दो
मैं नहीं हटूंगा
सदा डटा रहूंगा
मैं "अटल" वो द्वार हूं
हां, मैं चौकीदार हूं

अन्याय के विरुद्ध ये
शुरू हुआ है युद्ध ये
जम के मैं लडूंगा
वचन मैं ये दूंगा
मैं इसका भागीदार हूं
हां, मैं चौकीदार हूं

लूट अब न पाओगे
मुफ्त का न खाओगे
झूठ के प्रपंच से
वोट नहीं पाओगे
मैं सत्य की पुकार हूं
हां, मैं चौकीदार हूं

कब तलक बचाओगे
कहो कहां छुपाओगे
पाप के ये पुलिंदे
कहां लेके जाओगे
मैं सख़्त पहरेदार हूं
हां, मैं चौकीदार हूं



* ये सिर्फ और सिर्फ एक रचना है। इसका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है। ये देश की जनता को समर्पित है और उन्हीं के लिए है क्यूंकि ये सच है कि अगर हर व्यक्ति देश की रखवाली अपने घर की तरह करे तो शायद सुधार की संभावना है।
🙏🙏🙏



                                                                                  -संदीप सिंह











                    
                    

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